सरसों
बुवाई का सबसे बेस्ट तरीका | Sarso ki kheti 2025 | Sarso ki
top variety | Sarso me khad |Kheti
नमस्कार साथियों, सरसों
बुवाई का समय अब बिल्कुल नजदीक आ चुका है। सरसों वो एक फसल है जिसके अंदर बहुत कम
खर्च लगता है। बहुत कम मेहनत लगती है। बहुत कम सिंचाई लगती है। इन सब के बावजूद
अगर बात करें रबी सीजन के अंदर बोई जाने वाली चाहे कोई भी परंपरागत फसलें हो चाहे
वो आपका गेहूं हो, जौ हो। उनमें सबसे ज्यादा अगर कोई इनकम करा के
जाने वाली फसल है तो वह है सरसों। और इसका जो बुवाई का रबा है ना लगातार पिछले
चार-प सालों से धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। बढ़े भी क्यों नहीं? क्योंकि
सरसों की जो डिमांड है ना वो हमारे देश के अंदर लगातार बढ़ती जा रही है।
हमारे देश में
आज भी खाद्य तेलों का आयात होता है। दूसरे देशों से मंगाया जाता है। इसी वजह से
सरसों के जो बाजार भाव है ना वो लगातार साल दर साल इंक्रीज होते जा रहे हैं। रही
बात उत्पादन की तो भाई हमारे देश के अंदर बहुत सी जगह पर किसान है वो पर एकड़
मात्र 4 क्विंटल से लेकर और छह सात क्विंटल ही उत्पादन
ले पाते हैं। लेकिन भैया इसके विपरीत मैं एक सच्चाई बताता हूं आप लोगों को। सरसों
को अगर आप सही तरीके से उसकी बुवाई करते हो, सही
बीजों का सिलेक्शन करते हो, बुवाई टाइम के ऊपर आप खेत की अच्छे से
तैयारी करते हो, तो सरसों का उत्पादन है ना आप 12
क्विंटल से लेके और
13 14 क्विंटल पर एकड़ तक ले सकते हो।
यह सरसों का एक मैक्सिमम उत्पादन है और
इसको आराम से अचीव किया जा सकता है। दोस्तों मैं अलवर राजस्थान से बिलोंग करता हूं
और पूरे देश के अंदर अगर सरसों का सबसे ज्यादा रकबा सरसों का पर एकड़ उत्पादन सबसे
ज्यादा सरसों के अंदर तेल मात्रा अगर कहीं पर निकलती है तो वह अलवर भरतपुर जैसे दो
डिस्ट्रिक्ट जो राजस्थान के अंदर आते हैं यहां पर निकलती है। मैं बताऊंगा हमारे
यहां पर सरसों का पर एकड़ 12 से 13
क्विंटल किस तरह से लिया जाता है।
सरसों के अंदर 42%
तेल मात्रा है वो किस तरह से की जाती है ताकि सरसों है ना मंडियों में जाकर
सबसे ऊपरी भाव के अंदर बिके। भाव की भी अगर अपन बात करें तो भैया आजकल पिछले दो
चार सालों से हर एक मंडियों में लैब के अकॉर्डिंग आपकी सरसों की लैब निकाली जाती
उसी के हिसाब से जितने परसेंट आपके सरसों के अंदर तेल मात्रा है उसी के हिसाब से
आपको रेट दिए जाते हैं। लगभग एक क्विंटल सरसों के अंदर आपको डिफरेंस है ना वह ₹300 से
लेके और ₹500 ₹600 तक देखने को मिलता है। एक सरसों है वह ₹7000
में आज मंडी के अंदर बिक रही है।
वहीं दूसरी तरफ वही सरसों जो दिखाई
देने के अंदर सरसों है। लेकिन उसमें जब तेल मात्रा कम है तो वही सरसों ₹6000
क्विंटल में बिक रही है इस
टाइम के ऊपर मंडियों के अंदर। तो दोस्तों आज
मैं आप लोगों को इस वीडियो के माध्यम से बताऊंगा सरसों बुवाई का सही समय। सरसों की
बुवाई करते वक्त हमें कौन-कौन से बेसल डोज में खाद उर्वरक लेने हैं जिससे कि हमारा
उत्पादन भी अच्छा निकले। साथ ही तेल मात्रा है वो 42% या
इससे ज्यादा निकले। इसके अलावा मैं बताऊंगा आपको बुवाई का सही तरीका। बीज की आपको
कितनी मात्रा लेनी है? बीज को किस तरह से आपको उपचारित करना है?
ताकि अभी पिछले दो-तीन सालों से सरसों के अंदर सबसे बड़ी जो समस्या
किसानों के सामने आ रही है उनको फेस करनी पड़ रही है जो
तना गलन वाली उस तना गलन बीमारी से किस तरह से बचा जा सके।
आपके खेत के अंदर तनागलन बीमारी है वो
आए ही नहीं और साथ ही खरपतवार नियंत्रण किस तरह से हम खरपतवारों को शुरुआत में ही
नियंत्रण कर लें ताकि आगे चलकर हमारे खेत के अंदर खरपतवार हो ही नहीं। और इसके
अलावा भी मैं आपको बताऊंगा एक ऐसा तरीका जिससे सरसों की बुवाई करने के बाद बहुत से
खेत ना पूरी तरह से खाली हो जाते हैं। अब बुवाई करने के लगभग आगे जैसे सरसों
जर्मिनेट होती है तो 10-15 दिन के अंदर तो मैं बताऊंगा आपको वो
तरीका जिससे आपके खेत के अंदर एक-एक दाना वो जर्मिनेट भी होगा और एक-एक दाना वो
आखिरी टाइम
तक फलियां भी देंगा।
आप सरसों की बुवाई करना जा रहे हो या
फिर सरसों से आप तगड़ा उत्पादन लेना चाहते हो तो भैया प्लीज इस पोस्ट को अभी अपने दोस्तों
को शेयर कर दीजिए। इसके ऊपर मैं टाइम टू टाइम आपको सरसों संबंधित पोस्ट देता
रहूंगा दूसरे किसान साथियों तक इसको शेयर भी करना है। तो चलिए दोस्तों अब बात करते
हैं सबसे पहले सरसों बुवाई का सही समय क्या है?
वैसे तो लगभग 20
सितंबर के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे जो राज्य मध्य भारत के
अंदर जो राज्य या फिर राजस्थान के कुछ ऐसे डिस्ट्रिक्ट जो मध्य प्रदेश के टच में
है या फिर गुजरात के कुछ इलाके जहां पर टेंपरेचर थोड़ा सामान्य होता है वहां पर
लगभग 20 सितंबर से सरसों की बुवाई स्टार्ट हो जाती है।
अगर मैं बात करूं उत्तर भारत की विशेषकर नॉर्थ इंडिया के अंदर राजस्थान, हरियाणा,
पंजाब, उत्तर प्रदेश इस तरह के जो राज्य यहां पर सरसों
बुवाई का सही समय क्या है? तो देखो भैया सरसों की बुवाई तो किसान 1
अक्टूबर से यहां पर भी स्टार्ट कर देते हैं बुवाई करना।
पर लेकिन एक सही समय जो सरसों बुवाई का
है वह है मेरा मानना है कि 5 अक्टूबर से आप स्टार्ट कीजिए। 20
अक्टूबर के बीच के जो 15 दिन है इनके अंदर आप अपने खेतों के अंदर सरसों
की बुवाई कीजिए। अगर आपको 5 अक्टूबर के टाइम के ऊपर जब आप सरसों
की बुवाई कर रहे हो उस टाइम के ऊपर आपको टेंपरेचर थोड़ा ज्यादा लग रहा है और रात
का टेंपरेचर है वह भी 18, 17, 19° नहीं आया अभी तो आप थोड़ा रुक जाइए।
फिर आप उसको 10 अक्टूबर से लेके और 20 या
25 अक्टूबर के बीच में जो आने वाले 10 से
15 दिन होते हैं ना उस टाइम के ऊपर इसकी बुवाई
कीजिए। इसके अलावा अगर आपके खेत टाइम के ऊपर खाली नहीं हो रहे हैं।
जैसे कि बहुत से किसानों के खेत में
बाजरा फसल होती है। बहुत से खेतों के अंदर भैया कपास नरमा फसल होती है। बहुत से
खेतों के अंदर धान खड़ी हुई होती है और बहुत से खेतों के अंदर कोई सब्जी वर्ग की
फसलें होती है। तो उन किसानों के खेत अगर 20
अक्टूबर 25 अक्टूबर तक भी खाली नहीं होते तो भी आपको नहीं
घबराना है। आप नवंबर के फर्स्ट वीक में भी इसकी बुवाई कर सकते हो। तो वहां से भी
आप तगड़ा उत्पादन ले सकते हो। उसके लिए मैं बताऊंगा आपको थोड़ा सा एक्स्ट्रा एफर्ट
डालने होंगे। अगर मैं बात करूं इस खेत की इस खेत के अंदर हमने प्याज की बुवाई कर
रखी है।
यह प्याज हमारी लगभग 15 या
20 नवंबर के लगभग यह खेत से निकलेगी। हमारे खेत 15
20 नवंबर को खाली होंगे। मैं उस टाइम पर इस खेत के अंदर सरसों की बुवाई
करूंगा और फिर मैं इसके अंदर 12 क्विंटल कम से कम बता रहा हूं। आपको
फिर भी इसके अंदर उत्पादन लूंगा। बाकी हमारे जो खेत खाली हो चुके हैं उनके अंदर तो
हम 10 अक्टूबर से बुवाई स्टार्ट कर देते हैं। अब बात
आती है भैया बुवाई करने से पहले हमें खेत किस तरह से तैयार करने हैं और बेसल डोज़
के अंदर हमें कौन-कौन से खाद लेने हैं जिससे अच्छा उत्पादन और तेल मात्रा अच्छी
बढ़ के मिले।
तो सबसे पहले किसी भी फसल के अगर आपको
अच्छा उत्पादन चाहिए तो आपको अच्छी जुताई करनी होगी। विशेषकर इस टाइम के ऊपर जो भी
आपके पुरानी फसल के बचे हुए अवशेष आपके खेतों के अंदर हो चाहे वह किसी भी फसल के
हो उनको आप रोटावेट कर दीजिए। अच्छे से ऊन को जोत के मिट्टी के अंदर मिला दीजिए
ताकि वह पूरी तरह से डीकंपोज हो जाए। अब बात आती है इसके अंदर भैया सिंचाई की।
देखिए सरसों की दो तरह से बुवाई होती है खेतों के अंदर। जिनके खेत खरीफ सीजन के
अंदर खाली पड़े हुए होते हैं ना जो खरीफ सीजन के अंदर अपने खेतों के अंदर कोई भी
फसल की बुवाई नहीं करते।
उनके खेतों के अंदर बरसात जब होती है
तो वो बरसात की नमी को सहेज के रखते हैं। जुताई करके और ऊपर से पाटा लगा के रखते
हैं। उन खेतों के अंदर फिर वो सरसों की बुवाई करते हैं। तो उसके अंदर तो ऊपर से
पलेवा करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन जिन खेतों के अंदर कोई भी फसल आपने लगा रखी
थी खरीफ सीजन के अंदर और वो फसल काट के फिर आप सरसों की बुवाई करने जा रहे हो तो
उन खेतों के अंदर आपको पलेवा करना होगा। पलेवा करते वक्त जब आपने यह खेत जोते थे
जिन खेतों के अंदर पुराने बचे हुए अवशेष थे।
उन खेतों के अंदर आप पवा करने से पहले
जो भी आपके जूते बहे खेत है उसके अंदर आप पलेवा करने जा रहे हो उनके अंदर आप 25 किलो
से लेकर 35-40 किलो अगर यूरिया छिटक देते हो और ऊपर से आप
सिंचाई करते हो पलेवा करते हो तो आपके खेत के अंदर जितने भी बचे हुए पहले पुरानी
फसल के अवशेष थे ना वो पूरी तरह से डीकंपोज हो जाएंगे बहुत शानदार काम करेगा अब
पलेवा आपने कर लिया आपके खेत के अंदर नमी तैयार हो चुकी है या फिर ऐसे खेत जिनके
अंदर बारिश की नमी सहेज करके रखी हुई है वह खेत ऑलरेडी पहले से तैयार है अब इसके
अंदर बात आती है भैया बेसल डोज की अगर आपके पास देसी खाद खाद पड़ा हुआ है। चाहे वह
दो ट्रॉाली हो, तीन ट्रॉाली हो तो आप अपने खेत के अंदर उसको
छिटक दीजिए, बुरकाव कर दीजिए, फैला
दीजिए।
बहुत अच्छा है। अगर आपके पास खाद नहीं
भी है तो भी कोई बात नहीं। मैं बताता हूं अब आपको बेसल डोज़ के अंदर रासायनिक खाद
जो सरसों फसल के अंदर सबसे जरूरी है जिनकी बहुत ज्यादा आवश्यकता पड़ती है। तो सबसे
पहले सरसों के अंदर आवश्यकता पड़ती है फास्फोरस की। फास्फोरस अगर आपके खेत के अंदर
अच्छे से अवेलेबल होगा तो सरसों की जो जड़े हैं ना वह नीचे गहराई तक जाएगी। जितनी
ज्यादा सरसों की जड़े होंगी, जितनी ज्यादा वो गहरी जड़े होंगी ना,
उतना ही ऊपर चलकर पौधे का स्ट्रक्चर तैयार होगा। उसका कैनोपी तैयार होगी।
पौधे के अंदर उतनी अच्छी भैया ब्रांचेज निकलेंगी। जितनी
ज्यादा ब्रांचेज होगी, उतनी
ज्यादा उसके अंदर फलियां आएंगी और जितनी ज्यादा फलियां होंगी ना उतनी उसके अंदर
दाने होंगे और उतना उत्पादन ज्यादा होगा। तो फास्फोरस पूर्ति के लिए मैं तीन तरीके
बताते हैं हूं आपको। पहला है भैया एसएसपी सिंगल सुपर फास्फेट। सिंगल सुपर फास्फेट
के अंदर 16% फास्फोरस मिल जाएगा। इसके अलावा इसके अंदर
भैया सल्फर भी मिलेगी और साथ ही इसके अंदर थोड़ी बहुत मात्रा में कैल्शियम भी
मिलेगी। अब सिंगल सुपर फास्फेट की पूर्ति के लिए आपको एक ही बैग नहीं रखना होगा।
आपको पर एकड़ कम से कम दो से ढाई बैग डालने होंगे।
तब जाकर आप डीएपी जितना फास्फोरस है ना
उसकी आप पूर्ति कर सकते हो। दूसरा विकल्प है इसके अंदर भैया फास्फोरस पूर्ति के
लिए आपको इसके अंदर डीएपी डालना होगा। अब डीएपी आपको कितना डालना होगा? एक
बैग पूरा डीएपी के अंदर लगभग 46% फास्फोरस मिलता है। वहीं पे 18%
इसमें नाइट्रोजन भी मिलेगी। अगर आप एसएसपी यूज़ कर रहे हो, सिंगल
सुपर फास्फेट यूज़ कर रहे हो तो इसके अंदर आपको नाइट्रोजन पूर्ति के लिए थोड़ा सा
यूरिया की भी आवश्यकता पड़ेगी। लगभग आप 20 किलो यूरिया पर एकड़ के हिसाब से खेत
के अंदर ऊपर से छिटक दीजिए। उसको आपको फर्टिलाइजर वाली मशीन के अंदर डाल के ना
बोना नहीं है।
अगर उसको बोगे आप तो फिर एसएसपी वाला
जो खाद है और यूरिया है ना दोनों मिल जाएंगे और वो निकल नहीं पाएंगे मशीन के अंदर
से। अब ये दो तरह के खाद तो हो गए। अब तीसरा खाद बताता हूं। अगर आपको डीएपी नहीं
मिल रहा है। अगर आपको सिंगल सुपर फास्फेट है वो ऐसा लग रहा है कि यार इसको बहुत
ज्यादा डालना पड़ेगा। फिर जाके इसकी फास्फोरस की पूर्ति हमारे खेतों में हो पाएगी।
तो भैया आपको तीसरा विकल्प बता रहा हूं जो सबसे बेस्ट विकल्प है। अगर आपके एरिया
में आपके आसपास में टीएसपी ट्रिपल सुपर फास्फेट मिल रहा है तो एक पूरा बैग पर एकड़
जमीन के अंदर आपको उसकी बुवाई कर देनी है।
इसमें आपको डीएपी के बराबर ही 46%
फास्फोरस मिल जाएगा और साथ ही इसके अंदर आपको लगभग 15%
कैल्शियम भी मिल जाएगी अलग से। रही बात भाई नाइट्रोजन की तो हम जो यूरिया सिंगल
सुपर फास्फेट के साथ दे रहे थे 20-25 किलो वही यूरिया अगर हम टीएसपी के साथ
दे देंगे हम खेत के अंदर ऊपर से छिटक देंगे और फिर मशीन से हम टीएसपी की बुवाई कर
देंगे तो निश्चित तौर पर यह वाला जो कॉम्बिनेशन है ना टीएसपी प्लस यूरिया वाला यह
सबसे बेस्ट रहेगा क्योंकि इसके अंदर 46% फास्फोरस है और फास्फोरस भी भाई 92%
अवेलेबल फॉर्म में इसमें डीएपी में जहां फास्फोरस पूरी तरहसे मिट्टी के अंदर घुल
घुल नहीं पाता है पानी के साथ। वहीं पे टीएसपी के अंदर ट्रिपल सुपर फास्फेट के
अंदर जो फास्फोरस है वह 92% तक बल्कि 93% तक
घुलनशील है। वो आपको ज्यादा आपकी फसल को ज्यादा अवेलेबल हो पाएगा। तो बहुत से
किसानों के दिमाग में यह बातें चल रही थी। बहुत से किसानों के कमेंट भी आते हैं,
फोन भी आते हैं कि भैया हमारे यहां पर डीएपी नहीं है। टीएसपी मिल रहा
है। टीएसपी हम लें या ना लें यार यह तो नया खाद है। पता नहीं इसके अंदर कुछ है भी
कि नहीं। तो आप टीएसपी लीजिए। निशंकोच लीजिए।
अब बात आती है इसके अंदर इससे अगले
पोषक तत्व जो बहुत बड़ा योगदान देंगे इसके उत्पादन को बढ़ाने में और बीमारी से
बचाने में तो आपको लगभग 25 किलो से लेके 30
किलो इसके अंदर पर एकड़ बेसल डोज़ के अंदर ही म्यूरेट ऑो पोटाश है ना वह भी आपको
डाल देना है। म्यूरो पोटाश लेते वक्त थोड़ी सावधानी बरतना है आपको। आपको मोट पोटाश
आपको ओरिजिनल लेना है। आजकल बहुत ज्यादा भैया नकली फर्टिलाइजर बाजार के अंदर बहुत
आ चुके हैं। तो आपको बहुत ज्यादा अवेयर रहना है। साथ ही फिर बात आती है इसके अंदर
तेल मात्रा बढ़ाने के अंदर सबसे बड़ा योगदान देने वाला जो पोषक तत्व वो है सल्फर।
अगर आपने अपने खेतों के अंदर एसएसपी
सिंगल सुपर फास्फेट डाला है तो उसमें लगभग 11%
सल्फर तो आपको वहां से मिल चुकी है। लेकिन इस कुछ मात्रा से कुछ नहीं होने वाला
है। सरसों के अंदर तेल मात्रा बढ़ाने के अंदर सबसे बड़ा योगदान देता है सल्फर। अब
सल्फर की पूर्ति के लिए आपको पर एकड़ अगर आप बेंटोनाइट सल्फर ले रहे हो और
बेंटोनाइट सल्फर ही आपको लेना है बेसल डोज के अंदर तो लगभग पर एकड़ आपको 15
किलो सल्फर बेंटोनाइट वाला जो 90% आता है ना उसकी बुवाई इसी बेसल डोज
में इन्हीं खादों के साथ मिलाकर आपको कर देनी है। अब साथ ही इन्हीं खादों के अंदर
आपको एक चीज और मिलानी है ताकि आगे चलकर आपके सरसों के अंदर तना गलन वाली बीमारी
है ना वह आपके खेत के आसपास भी ना आ पाए। तो इसी बेसल डोज के अंदर आपको लगभग आधा
किलो 500 ग्राम थाफिनेट मिथाइल जो रोको के नाम से आता
है ना वह भी आपको मिला देना है। अगर यह सब चीजें आप खाद के अंदर मिला के और अपने
खेत के अंदर बेसल डोज़ में इस फर्टिलाइजर को बुवाई कर देते हो तो पूरे खेत के अंदर
जहां पे आपकी फसल को फास्फोरस भी मिलेगा, नाइट्रोजन भी मिलेगा, कैल्शियम
भी मिलेगा, सल्फर भी मिलेगी। वहीं पे दूसरी तरफ आपके खेत
के अंदर पूरी तरह से अगर कोई फंगस जनित कोई स्पर्स पड़े होंगे, फंगस
जनित कोई बीमारी पड़ी होगी तो वह भी मर जाएगी।
फिर बात आती है भैया एक बढ़िया वैरायटी
की। सरसों की बेस्ट वैरायटी के ऊपर हमारी वीडियो है वो ऑलरेडी तैयार हो चुकी है।
अगली वीडियो आपको हम बताएंगे सरसों की बेस्ट वैरायटियों के ऊपर। कौन सी वैरायटी ने
पिछले दो-ती सालों में सबसे तगड़ा उत्पादन दिया हमारे खेतों में और लगभग मैंने 50
किसानों से संपर्क किया है। उनसे मैंने पूछा है तो एक ऐसी वैरायटी निकल के आई है
अब की बार जिसका उत्पादन जबरदस्त चाहे आपकी हल्की मिट्टी हो चाहे आपकी भारी मिट्टी
हो चाहे आपके कम पानी हो ताबड़तोड़ उत्पादन उसका निकला है जबरदस्त उसके जो है ना
पैदावारी आई है तो वह बताऊंगा मैं आपको अगले ब्लॉग के अंदर। फिर बात आती है बुवाई के
लिए बीज मात्रा तो भैया 1 एकड़ जमीन के अंदर आपको 1
किलो सीड है ना उसकी आवश्यकता पड़ेगी। 1 किलो से ज़्यादा नहीं लेना है। 100
50 ग्राम कम रह जाए कोई दिक्कत नहीं है। ज्यादा गहरी अगर आप सरसों बोते
हो तो आगे चलकर उसके अंदर बीमारी भी आएगी और साथ ही उसके अंदर निकलने वाली जो
ब्रांचेज है वो कम रह जाएगी। फलियां कम रह जाएगी। पौधा है ना अच्छे से वह अपनी
कैनोपी नहीं बना पाएगा। तो इसके अंदर आपको 1
किलो पर एकड़ के हिसाब से ऊपर आपको दाने नहीं डालने हैं।
अपने खेत में बुवाई नहीं करनी है। अब
बुवाई करते वक्त आपको जो सीड आपने लिया है ना जो यह बीज लिया है ना उसको भी
आपको उपचारित कर लेना है। उपचारित करने के लिए आपको इसके अंदर एफआईआर विधि अपनानी
है। एफआईआर विधि के अंदर पहले फजीसाइड लेना है। जैसे कार्बेंजब होता है। मैनकोजेब
होती है। दूसरा आपको लेना है इसके अंदर इंसेक्टिसाइड और फिर लेना है आपको कोई भी
राइजोबियम कल्चर जो आते हैं ना वो। या फिर आजकल बाजार के अंदर बहुत से अच्छे-अच्छे
कॉम्बिनेशन है। जैसे कि एजोस्ट्रोबिन के साथ थाफिनेट, मिथाइल
और थाईमेथोम के कॉम्बिनेशन आ रहे हैं। 2 ml पर 1
किलो बीज के अंदर आपको सीड ट्रीट कर देना है। उसको अच्छे से सुखा लेना है।
और फिर
दोबारा इसके अंदर आपको खेतों के अंदर उसकी बुवाई कर देनी है। अब बुवाई करते वक्त
आपको कौन सी विधि अपनानी है? हमारे देश के अंदर एक तो ब्रॉडकास्टिंग
विधि से सरसों की बुवाई होती है। दूसरा हमारे देश के अंदर जैसे हम अपने यहां पर
करते हैं भैया वो सीड ड्रिल मशीन से करते हैं। आप सीड ड्रिल मशीन से बुवाई कीजिए।
वह सबसे बेस्ट होता है। अगर आप ब्रॉडकास्टिंग विधि से बुवाई करते हो तो आगे चलकर
पौधा है ना वह गिर जाता है। उसके अंदर अच्छे से ब्रांचेज़ नहीं निकल पाती। पौधा
अच्छे से पूरी अपनी कैनोपी नहीं बना पाता है। आप अगर खुडों के अंदर मेडों के अंदर
इसकी बुवाई
करते हो सीडल मशीन से तो निश्चित तौर पर आपकी जो फसल आगे चलकर बहुत शानदार कैनोपी
बनाएगी। बहुत अच्छे से उसके अंदर निकलने वाली ब्रांचेज है वह होगी। यह काम करने के
बाद फिर बात आती है खरपतवार नियंत्रण। खरपतवार नियंत्रण के लिए भैया जैसे ही आपने
अपने खेत के अंदर सरसों की बुवाई की अगर आपने पड़े हुए कर रखा है खेत के अंदर आपके
नमी है तो बुवाई करने के लगभग आपको 72 घंटे के अंदर-अंदर इसमें पेंडामथिलीन 1
लीटर पर एकड़ के हिसाब से जो स्टम वगैरह के नाम से आती है अलग-अलग कंपनियों का
अलग-अलग नाम है उसको आपको ऊपर से स्प्रे कर देनी है ताकि आपके खेत के अंदर
अगर नमी होगी तो वह नीचे तक चली जाए। पूरी मिट्टी के अंदर मिल जाए और मिट्टी में
पड़े हुए जो भी खरपतवार के बीज है वह निष्क्रिय हो जाए। यह करने के बाद भैया तीसरे
चौथे दिन आपकी सरसों की जो पौधा है वह जर्मिनेट हो जाएगा। जर्मिनेट होने के लगभग
तीन-चार दिन के बाद कई बार क्या अपन देख रहे हैं कि पौधे सूख जाते हैं। उस अवस्था
के अंदर आपको इसके अंदर 1/2 ml मोनोक्रोटोफोस के साथ 1
ग्राम पर 1 लीटर पानी के अंदर साफ पाउडर आता है ना कार्बेंडिज
मैनकोजे उसका आपको स्प्रे कर देना है। फिर आप निश्चिंत रहिए। किसी भी तरह से आपकी
फसल के ऊपर कोई दिक्कत नहीं आएगी। आप इस तरह से अपनी सरसों की बुवाई कीजिए।
इससे आगे जो भी कुछ काम करने है या फिर सरसों की एक टॉप वैरायटी की अगर अपन बात
करें तो बहुत जल्द आपके लिए हम सरसों की टॉप वैरायटी के ऊपर BLOG
लेकर आएंगे।
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